Tuesday, April 26, 2011

पिछली यादों के साये ....



आज बस मन क्र गया कुछ दिल से लिखा हुआ पड़ने का, इसलिए इस पेज पर दोबारा आया। कुछ लिखते ख़त्म की और कुछ को संवारा। आज कल लिखने का मन नही करता । अपना पूरा समय मेन अकादमिक कामो को दे रहा हूँ। इसलिए भावनाओं में बहना बंद कर अब कुछ सृजनात्मक करने के प्रयास में हूँ। अगर कभी मन किया तो दोबारा इस पेज पर लिखना शुरू करूंगा। खुश रहना और हमे याद रखना । फिर मिलते हें।

Friday, March 20, 2009

सोचे ही जा रहा हूँ

आज रात जैसे कटने का

नम नही ले रही है।

जनता हूँ सब व्यर्थ है,

फ़िर भी सोचे ही जाना रहा हूँ।

काश एसा होता,

काश ये न होता।

बस उलझता ही जा रहा हूँ।

कुछ पल के दुरी को

लान्गने में,

अपने को असमर्थ पा रहा हूँ।

तुझे मैं अपने से दूर

करने की कोशिश में,

और भी ज्यादा तन्हा होता जा रहा हूँ।

ख़ुद को क्यों "राज",

कैद करता जा रहा हूँ॥

२३-०२-२००८





Monday, March 16, 2009

तुम ही हो......

Dear,
आपसे से भागते हुए आज मैंने अपने आप को साहित्य में खोने का डिसीजन लिया, लाइब्रेरी गया और एक नोवेल खोज लाया, सोचा की कुछ फिलोसोफिकल होगा. उसका टाइटल था "तत्वमसि " "That is You". उससे पढ़ना की सुरुआत में सोचा की तुम्हे भूल जाऊंगा लेकिन, वहा मुझे तुम ही तुम दिखने लगी. और मैंने पढना बंद कर दिया. क्या करता, मन तुम्हारी सोच में डूब गया, समझ नही आता क्या करू. अपने आप पर नियंत्रण रखना चाहता हु और तुमसे दूर होने की बजाये जुधता जाना रहा हु. बस यही कहना चाहूँगा:
तुम मुझसे दूर मत जाना,
मैं तुमसे दूर चला जाऊंगा.

------पागल
04.08.pm
16-03-2009

Tuesday, January 6, 2009

कुछ दिल के गमगीन पल.....

आज कुछ छोटे छोटे टुकड़े है भावनाओ के जो आपके सामने रख रहा हूँ।शायद आपको अच्छे लगेअगर नही तो कोई बात नही अपने लिए लिख रहा हूँ।

कुछ पल के चाहत का,
सबब यही मिला।
कि जो सोचा वो हमसे ,
दूर ही खडा मिला।
किससे कहते दिल कि सदा,
जो भी मिला,
कान बंद किए हुए मिला।
०१-०१-२००८

जाते हुए को सदा दे देनी चाहिए।
कभी- कभी अपने दिल कि भी सुन लेनी चाहिए।
है शौक हम कदम होने का "राज",
तो कुछ कदम साथ चलने कि भी,
जुर्रत होनी चाहिए।
०३-०१-२००८

Friday, June 27, 2008

मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ....

मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
उन सारी अनकही चाहतों को,
उन सभी अधूरे लम्हों को,
न पूरे हो सके जो कभी।

मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
उन सभी सपनों को,
जिन्होंने जन्म पाया तुम्हारे साथ से।

मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
मन की उन gahraiyon को,
तह न पा सका मैं जिनकी स्वयं कभी।

मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ ,
हर पल जागती,
हर पल रौती ,

उन भावनाओं को,
जिन्हें अपने शब्द न दे सका कभी ।
मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ.......
Dated:२६-०६-२००८

Last Updated:26-04-2011

Tuesday, June 10, 2008

छोटे छोटे लम्हे

आज कुछ छोटे छोटे लम्हों का जिक्र है:

तेरी कशिश मुझे उलझा रही है,
कही दबा दर्द जगा जाती है।
आंसू ही हमे सम्भाल लेते हैं वरना,
ऐसी गलती की बड़ी ही सजा होती है ॥
०९-१२-2007
कुछ कदम साथ चलने की कोशिश में,
अपना सफर हम भुला बैठे।
पल भर की दुरी तय करते-करते ,
कई सदियाँ हम गवां बैठे॥
१८-१२-२००७
हैं नही उम्मीद फ़िर भी मन करे,
कोई शाम तेरे संग बिताऊ।
हर एक साँस लगे इस तरह,
ख़ुद के लिए जैसे मैं एक सजा हूँ।
२०-१२-२००७
मन करता है हर शै से भाग जाऊँ,
अपने बीच की हर दुरी को पाट जाऊँ।
कैसे कहूँ की मेन बैचैन नहीं,
इस उफनते ज्वार को कैसे रोक पाऊ ।
२१-१२-२००८

Last updated:26-04-2011

Wednesday, May 28, 2008

मन से कहता हूँ


आज काफी दिनो बाद मन मे आया की कुछ लिखूं , कई दिनो से मन परेशान था इसलिए की कुछ ऐसा हुआ की मन उदास सा हुआ। क्या कोई अपनी भावनाओ को दबा कर रखे या उसे प्रकट करे इस गुत्थी को सुलझाना चाहता हूँ। आपकी दो चार साल की दोस्ती के बाद भी अगर आपसे कुछ सीधे न कह कर किसी दुसरे के मध्यम से कहे तो आपको कैसा लगेगा, क्या प्रतिक्रिया होगी आपकी... क्या अगर आप से कोई नाराज हो तो क्या आप इस काबिल भी नही रहते की वह आपको सीधे मुह बात करने लायक भी न समझे ॥ इन अजनबी रिश्तों की दोड़ मे क्या इंसानियत नाम की चीज़ नही होती....मुझे तो ऐसा ही लगता है .

जाएँ तो जाएँ कहाँ
समझेगा कौन यहाँ दर्द भरे दिल की जुबाँ
जाएँ तो जाएँ कहाँ

मायूसियों का मजमा है जी में
क्या रह गया है इस ज़िन्दगी
रुह में ग़म दिल में धुआँ

जाएँ तो जाएँ कहाँ
उनका भी ग़म है अपना भी ग़म है
अब दिल के बचने की उम्मीद कम है
एक किश्ती सौ तूफ़ाँ
जाएँ तो जाएं कहाँ (साहिर लुधियानवी )
Miss You ........................R....P.