Friday, March 20, 2009

सोचे ही जा रहा हूँ

आज रात जैसे कटने का

नम नही ले रही है।

जनता हूँ सब व्यर्थ है,

फ़िर भी सोचे ही जाना रहा हूँ।

काश एसा होता,

काश ये न होता।

बस उलझता ही जा रहा हूँ।

कुछ पल के दुरी को

लान्गने में,

अपने को असमर्थ पा रहा हूँ।

तुझे मैं अपने से दूर

करने की कोशिश में,

और भी ज्यादा तन्हा होता जा रहा हूँ।

ख़ुद को क्यों "राज",

कैद करता जा रहा हूँ॥

२३-०२-२००८

Monday, March 16, 2009

तुम ही हो......

Dear,
आपसे से भागते हुए आज मैंने अपने आप को litrature में खोने का डिसीजन लिया, लाइब्रेरी गया और एक नोवेल खोज लाया, सोचा की कुछ फिलोसोफिकल होगा. उसका टाइटल था "Tatvmsi" "That is You". उससे पढ़ना की सुरुआत में सोचा की तुम्हे भूल जाऊंगा लेकिन, वहा मुझे तुम ही तुम दिखने लगी. और मैंने पढना बंद कर दिया. क्या करता, मन तुम्हारी सोच में डूब गया, समझ नही आता क्या करू. अपने आप पर नियंत्रण रखना चाहता हु और तुमसे दूर होने की बजाये जुधता जाना रहा हु. बस यही कहना चाहूँगा:
तुम मुझसे दूर मत जाना,
मैं तुमसे दूर चला जाऊंगा.

------पागल
०४.०८.pm
१६-०३-2009

Friday, March 6, 2009

अनसुना खत....

आज काफी दिनों बाद
एक प्यारे दोस्त से मुलाकात हुई
मन खुश था, आनंदित था।
मन कृतज्ञता से झुक गया।
जिस शक्स से मैं,
अपने आप को chhupata था,
भागता था,
उसका हँसता हुआ चेहरा,
आज मेरे सामने था।
मैं आज खुश हूँ,
मैं बंधन मुक्त हूँ।
किसी एसे शक्स की वजह से,
जिसको मैं चाहता हूँ,
आज उसकी दोस्ती मेरे लिए,
वरदान hue , eisa मैं अनुभव कर रहा हूँ,
उसके जीवन भर के साथ की कामना में,
एक "अनसुना खत" लिख रहा हूँ॥
After January,2009.

Tuesday, January 6, 2009

कुछ दिल के गमगीन पल.....

आज कुछ छोटे छोटे टुकड़े है भावनाओ के जो आपके सामने रख रहा हूँ।शायद आपको अच्छे लगेअगर नही तो कोई बात नही अपने लिए लिख रहा हूँ।

कुछ पल के चाहत का,
सबब यही मिला।
कि जो सोचा वो हमसे ,
दूर ही खडा मिला।
किससे कहते दिल कि सदा,
जो भी मिला,
कान बंद किए हुए मिला।
०१-०१-२००८

जाते हुए को सदा दे देनी चाहिए।
कभी- कभी अपने दिल कि भी सुन लेनी चाहिए।
है शौक हम कदम होने का "राज",
तो कुछ कदम साथ चलने कि भी,
जुर्रत होनी चाहिए।
०३-०१-२००८

Tuesday, November 4, 2008

तेरा नाम........

तू कौन है मेरे लिए ,मैं बता सकता नहीं।
वक्त मिला तो तुझसे जुदा होकर सोचूंगा कभी।
तेरा नाम अक्सर उभरता है मेरी जुबान से,
अपना नाम लेना चाहता हूँ जब कभी।
अपनी सांसों को थाम लेना,
तेरा नाम सुनने से गवारा है मेरे लिए।
चाहता तो बहुत हूँ,तेरे साथ,
अपना नाम भी लेना कभी।
एक अरसे से जुबान ने चुप्पी लगा रखी थी।
आज तेरा नाम लेते, जुबान थकती नही।
कौन सी खुशी मिलती है,
अब तलक न जान सका।
फ़िर भी तेरा नाम लेता हूँ हर घड़ी ।
कोशिश रही तुझे भूल जाने की,
आदत सी बनती तू मेरे करीब आती गई।
लोग कहते है, तुझे मतलबी "राज",
वफ़ा करने वालों संग, जबकि कभी बनी नहीं ॥
१७-०४-2007

Friday, June 27, 2008

तेरी सांसों में मुझको...

तेरी सांसो में मुझको पनाह मिल जाए,
होश खो चुका हूँ कुछ तो सुकून मिल जाए।

अश्क बिखरते हैं मेरी इन निगाहों से हर सू
कुछ घड़ी को तो ये ठहर जाए।

मेरी तमन्ना मैं तेरे काबिल ना सही,
पर ये बता क्यों मेरी ख्वाहिशो की उमर ght जाए।

मैंने जाना है तेरी हर दस्तक को,
क्योंकर भला यादों का सिलसिला रुक जाए।

एक तमाशा है हर आशिक ऐ "राज" यू ही सही,
फ़िर भी क्यों वो करम से बदतर सजा पाए॥

Dated: २८-जून-२००८

last update:१५-१०-२००९

मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ....

मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
उन सारी अनकही चाहतों को,
उन सभी अधूरे लम्हों को,
न पूरे हो सके जो कभी।

मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
उन सभी सपनों को,
जिन्होंने जन्म पाया तुम्हारे साथ से।

मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
मन की उन gahraiyon को,
तह न पा सका मैं जिनकी स्वयं कभी।

मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ ,
हर पल जागती,
हर पल routi ,

उन भावनाओं को,
जिन्हें अपने शब्द न दे सका कभी ।
मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ.......
Dated:२६-०६-२००८

last update:१५-१०-2009