
आज काफी दिनो बाद मन मे आया की कुछ लिखूं , कई दिनो से मन परेशान था इसलिए की कुछ ऐसा हुआ की मन उदास सा हुआ। क्या कोई अपनी भावनाओ को दबा कर रखे या उसे प्रकट करे इस गुत्थी को सुलझाना चाहता हूँ। आपकी दो चार साल की दोस्ती के बाद भी अगर आपसे कुछ सीधे न कह कर किसी दुसरे के मध्यम से कहे तो आपको कैसा लगेगा, क्या प्रतिक्रिया होगी आपकी... क्या अगर आप से कोई नाराज हो तो क्या आप इस काबिल भी नही रहते की वह आपको सीधे मुह बात करने लायक भी न समझे ॥ इन अजनबी रिश्तों की दोड़ मे क्या इंसानियत नाम की चीज़ नही होती....मुझे तो ऐसा ही लगता है .
जाएँ तो जाएँ कहाँ
समझेगा कौन यहाँ दर्द भरे दिल की जुबाँ
जाएँ तो जाएँ कहाँ
मायूसियों का मजमा है जी में
क्या रह गया है इस ज़िन्दगी
रुह में ग़म दिल में धुआँ
जाएँ तो जाएँ कहाँ
उनका भी ग़म है अपना भी ग़म है
अब दिल के बचने की उम्मीद कम है
एक किश्ती सौ तूफ़ाँ
Miss You ........................R....P.