मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
उन सारी अनकही चाहतों को,
उन सभी अधूरे लम्हों को,
न पूरे हो सके जो कभी।
मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
उन सभी सपनों को,
जिन्होंने जन्म पाया तुम्हारे साथ से।
मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
मन की उन gahraiyon को,
तह न पा सका मैं जिनकी स्वयं कभी।
मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ ,
हर पल जागती,
हर पल रौती ,
उन भावनाओं को,
जिन्हें अपने शब्द न दे सका कभी ।
मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ.......
Dated:२६-०६-२००८
Last Updated:26-04-2011
In this section you can find the collection of my poems, written in different moods and explain my feelings. I have dedicated this section to my friend. I have given her the name "RASHMI" and I love her so much. Copyright© Desh Raj Sirswal
Friday, June 27, 2008
Tuesday, June 10, 2008
छोटे छोटे लम्हे
आज कुछ छोटे छोटे लम्हों का जिक्र है:
तेरी कशिश मुझे उलझा रही है,
कही दबा दर्द जगा जाती है।
आंसू ही हमे सम्भाल लेते हैं वरना,
ऐसी गलती की बड़ी ही सजा होती है ॥
०९-१२-2007
कुछ कदम साथ चलने की कोशिश में,
अपना सफर हम भुला बैठे।
पल भर की दुरी तय करते-करते ,
कई सदियाँ हम गवां बैठे॥
१८-१२-२००७
हैं नही उम्मीद फ़िर भी मन करे,
कोई शाम तेरे संग बिताऊ।
हर एक साँस लगे इस तरह,
ख़ुद के लिए जैसे मैं एक सजा हूँ।
२०-१२-२००७
मन करता है हर शै से भाग जाऊँ,
अपने बीच की हर दुरी को पाट जाऊँ।
कैसे कहूँ की मेन बैचैन नहीं,
इस उफनते ज्वार को कैसे रोक पाऊ ।
२१-१२-२००८
Last updated:26-04-2011
तेरी कशिश मुझे उलझा रही है,
कही दबा दर्द जगा जाती है।
आंसू ही हमे सम्भाल लेते हैं वरना,
ऐसी गलती की बड़ी ही सजा होती है ॥
०९-१२-2007
कुछ कदम साथ चलने की कोशिश में,
अपना सफर हम भुला बैठे।
पल भर की दुरी तय करते-करते ,
कई सदियाँ हम गवां बैठे॥
१८-१२-२००७
हैं नही उम्मीद फ़िर भी मन करे,
कोई शाम तेरे संग बिताऊ।
हर एक साँस लगे इस तरह,
ख़ुद के लिए जैसे मैं एक सजा हूँ।
२०-१२-२००७
मन करता है हर शै से भाग जाऊँ,
अपने बीच की हर दुरी को पाट जाऊँ।
कैसे कहूँ की मेन बैचैन नहीं,
इस उफनते ज्वार को कैसे रोक पाऊ ।
२१-१२-२००८
Last updated:26-04-2011
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