अनंत काल की ओर



समय कभी एक सा नहीं रहता
जिसको आप अपना कहते हो
वह हमेशा एक सा नहीं रहता।

भावनाएं बनती -बिगड़ती रहती है
जब हम उन्हें  सहेजने की कोशिश करते हैं
अपना सन्तुलन भी गवां देते हैं।

आप आप हो जब तक भावनाऐ जुड़ी है
दूरियां होते ही सब अपने में सिमट जाता है
या यूं कहें समेटना पड़ता है।

भावनाएँ कभी मरती नहीं
सच है यह
पर ये कभी बदलती भी नहीं।
आपको हमेशा कहीं न कहीं
ये छुपकर आघात देती रहती हैं।

कभी कभी अनुभव होता है
की दुनिया जीत सकते है
अगले ही पल सब हारा हुआ महसूस करते है।
यही भाव हमें जीने से डराता है
उस अनन्त को पाने को प्रेरित करता है
जहां शरीर का बंधन खत्म हो जाता है।

कुछ लोग शरीर से ही
भावनाओं को जीतने की कोशिश करते हैं
 शायद सफल भी हो जाते हैं।
पर वह अनंत सीमित होता है
अगला शरीर मिलने तक।

यही लालसा हमें जीने को प्रेरित करती है
पर इसके लिए भावनाओं के साथ कोई चाहिए।
यही वो चीज़ है जो हमें जीने देती है
और मरने को प्रेरित करती है।

हमें स्वयं तय करना है
हम किस और जाना चाहते है।
जीवन की पूर्णता
भावपूर्ण अनन्त से ही है केवल क्षण से नही।

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