ख्वाहिशों का खेल




पल पल तेरी याद  में
एकांत को जी रहा हूँ ।
पल पल तेरी याद में
जीने का सबब खो रहा हूँ ।

उम्मीद की सीमा खत्म हुई,
खुद की आवाजों को सुन रहा हूँ।
पल पल तेरी याद में
जीने का मोह खो रहा हूँ।

उम्मीदें हर रोज तेरा नाम पुकारती हैं,
अपने आप ही सब मोह तोड़ रहा हूँ।
पल पल तेरी याद में
अपने को तोड़ रहा हूँ।

तेरी बातें तेरा एहसाह लेकर
जीवन से कड़िया जोड़ रहा हूँ।
पल पल तेरी याद में
दिल को तनहा छोड़ रहा हूँ।

अधूरी चाहतें हंसती है मुझ पर,
अपने सपनों को एक एक कर तोड़ रहा हूं।
पल पल तेरी याद में,
जीने की आस छोड़ रहा हूं।

मंजिल सबको मिल जाती है "राज"
दिल के अरमानों को बस संजों रहा हूँ।
तेरी सूरत को में, अपना अक्ष खोज रहा हूँ।
पल पल तेरी याद में ,
जिंदगी को तनहा छोड़ रहा हूँ।

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