मैं, हम और जिंदगी



एक अधूरी ख्वाहिश लेकर  चल रहा हूँ,
आपको  न पा सकने का  गम ढो रहा हूँ।

हमारी ख्वाहिशें हम दोंनो की ख्वाहिशें नहीं हैं,
बेशक पता है फिर भी बस चल रहा हूँ।

हर पग पर साथ का वादा यूँ ही नहीं है
उसको पूरा करने का पूरा  हौंसला रखता हूँ।

बेशक हम रहें एक दूसरे से खफा दिलों के मायने में,
तेरी ख्वाहिशों के असल होने का रोज सपना देखता हूँ।

जब भी मिले साथ तुम्हारा मुझे, कोई बात नहीं,
अपने दिल को धरती -आकाश सा खुला रखता हूँ।

कभी तुझे जरूरत हो,  मेरी इन कमियों के बावजूद,
रोशनी -ए- चाहत को लेकर, मैं बस चल रहा हूँ।

तुझे पता है हमारे एक दूसरे के साथ होने का मायने,
इसी सब्र से ही जिंदगी से हर पल लड़ रहा हूँ।

मेरे जीवन के हर मंजर में तेरा ही सपना है "राज"
सपनों की होली के बावजूद भी बस  हँस रहा हूँ।
तू कुछ भी कहे, ए मेरे खूबसूरत दोस्त, 
मैं तेरे संग संग अपनी  भी जिंदगी को  मायने दे रहा हूँ।।

Popular posts from this blog

वास्तविकता का अंगीकार

ख्वाहिशों का खेल